Tuesday 8 May 2012

मां से प्यारः बुराई छोड़ कर दो उपहार

क्या सच में आप अपनी मां से प्यार करते हो। यह सवाल ऐसा है कि अमूमन जिससे भी पूछोगे, तो जवाब हां में ही आएगा। यदि किसी बच्चे से पूछा जाए कि वह सबसे ज्यादा किससे प्यार करता है, तो उसका उत्तर यही रहेगा कि अपनी मां से। बड़ा होने तक व्यक्ति यही कहता है। फिर शादी होती है तो कुछ अपनी राय बदल देते हैं और पत्नी व बच्चे मां का स्थान ले लेते हैं। फिर भी कई अपनी यह धारणा नहीं बदलते। यही नहीं संकट की घड़ी में भी बच्चे से लेकर बडे तक मां ही याद करते है। जब बच्चे को चोट लगती है तो वह मम्मी ही चिल्लाता है। हाय मां मै मर गया। यह अक्सर लोग कहते हैं, लकिन हाय पिताजी मैं मर गया, यह शायद ही कोई कहता हो। यानी दुखः में हमेशा मां ही याद आती है।
अब रहा मां से प्यार का सवाल। कोई अपनी मां से कितना प्यार करता है। उस मां से जो औलाद के लिए हमेशा कष्ट सहती रही। बच्चे के लालन पालन में कोई कमी न आए, उसका पहला कर्तव्य बना। उसके भले के लिए ही वह हमेशा सोचती रही।  उस मां को प्यार करने के सवाल का जवाब देने से पहले हमें यह सोचना होगा कि हम अपनी मां की हर छोटी-बड़ी बातों को कितना तव्वजो देते हैं। मां तो हमेशा सही राह ही बताती है। कुछएक अपवाद हो सकते हैं, लेकिन कोई मां नहीं चाहेगी कि उसकी औलाद गलत दिशा में जाए। मां की डांट जो बचपन में बुरी नहीं लगती थी, वही बड़े होने पर क्यों बुरी लगने लगती है। मां तो हमेशा भले के लिए ही डांट लगाती है और अच्छी सलाह देती है। यही नहीं पिता की बजाय मां के समक्ष बच्चे या बड़े अपने राज खोल देते हैं। वह तो औलाद की गलती छिपाती है और उसे दोबारा गलती न करने की सलाह भी देती है। कई बार तो अपने पिता को मनाने व किसी बात को समझाने के लिए बच्चे मां को हथियार के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं। उस मां से प्यार करने की बात कहने से पहले हमें यह जरूर देखना चाहिए कि हम अपनी मां का व्यवहारिक रूप में कितना आदर करते हैं।
 एक व्यक्ति काफी शराब पीता था। उसके शराब पीने से घर में पत्नी व बच्चे भी परेशान रहने लगे। सभी उसे समझाते, लेकिन वह तो शराब का आदि हो चुका था। उसे दूसरों की सीख भी बुरी लगती थी। उसकी मां समझा-समझा कर हार गई। बाद में उसकी मां ने यह तक सलाह दी कि यदि तूझे शराब पीनी है तो शाम को घर में पिया कर। बाहर से पीकर मत आया कर। नशे में दुर्घटना का भय रहता है। मां कितनी परेशान थी अपने इस बेटे के लिए। पर बेटा तो अज्ञानवश यह भी नहीं समझ पा रहा था कि उसकी एक आदत से पूरा घर परिवार प्रभावित हो रहा है। एक दिन बेटे से मैने पूछा कि तू दुनियां में सबसे ज्यादा किसे प्यार करता है, तो तपाक से उसका जवाब था कि अपनी मां से। मैने उससे कहा कि तू झूठ बोल रहा है। इस पर वह मुझसे लड़ने-भिड़ने को आ गया। इस पर मैने समझाया कि यदि उसे अपनी मां से प्यार होता तो मां के कहने से शराब छोड़ चुका होता। मां से ज्यादा तो वह शराब से प्यार करता है। जो शराब को छोड़ने को तैयार नहीं है। वह अपनी मां से प्यार करने की बात पर अड़ा रहा, लेकिन शराब छोड़ने को भी तैयार नहीं था। ऐसे में स्पष्ट था कि मां से ज्यादा वह शराब को प्यार करता है।
मेरा एक मित्र अपना समाचार पत्र निकालता है। करीब 15 साल पहले तक उसकी भी अत्यधिक शराब पीने की आदत थी। रात के 12 बजे तक अक्सर वह ऐसी पार्टी में होता, जहां शराब के दौर चल रहे हों। एक दिन मित्र की माता का देहांत हो गया। मरते समय उसकी मां ने बेटे से वचन लिया कि शराब छोड़ दे। मित्र ने भी वचन निभाया और शराब को फिर कभी हाथ नहीं लगाया। इसे कहते हैं मां का प्यार। वह मां जो अपने जीते जी बेटे को अपनी बात नहीं मनवा सकी, मरते दम तक बेटे को सही राह में लाने का वह प्रयास करती रही। यह प्रयास रंग भी लाया। मां के दुनियां से विदा होने के बाद ही बेटे को अक्कल आई। अब शायद उसे पछतावा होता है कि यदि वह मां के जिंदा रहते शराब छोड़ता, तो यह देखकर उसकी मां को कितनी खुशी होती।
मां कभी अपनी औलाद का बुरा नहीं चाहती। वह तो उसके भले के लिए हमेशा चिंतित रहती है। वे लोग सौभाग्यशाली हैं जो अपनी मां के साथ रहते हैं। इसके विपरीत जो परिस्थिति या मजबूरीवश अपनी मां से अलग रहते हैं उन पर मुझे तरस भी आता है। फिर भी मैं तो यही कहूंगा कि अपनी मां से प्रेम करते हो तो वह  आपसे जो अपेक्षा रहती है, उस पर खरा उतरने का प्रयास करो। तब देखो की मां को खुश रखकर कितना मजा आता है। हां जिनकी मां अब नहीं है, उनके लिए तो यहीं कहूंगा कि वे यही सोचें कि अगर मां होती, वह क्या अपेक्षा करती। उसी अपेक्षा के अनुरूप वे अपने को ढालें। मां की अपेक्षा के अनुरूप यदि हम एक बुराई को छोड़ देंगे तो यही मदर्स- डे में मां के लिए सबसे बड़ा उपहार होगा।  
                                                                                          भानु बंगवाल

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